Tuesday, 21 September 2010

तुम देना साथ मेरा

सुबह और हर शाम में
हर तिथि-त्योहार में
सूखे पत्तों की सरसराहट
और बरसात-बहार में
तुम देना साथ मेरा।

जलती दोपहरी में
जिंदगी काली सुनहरी में
जब हो सबसे ज्यादा जरूरत
मरहम की इस दिल में
तुम देना साथ मेरा।

जीवन के हर रंग में
रंग में प़ गए �ंग में
चलती हो जिंदगी जब
धक्का स्टार्ट में
तुम देना साथ मेरा
ऐ हमनवा...

1 comment:

समय चक्र said...

क्या बात है ... बढ़िया