जब मैं मां की गोद को
जहां अपना समझता था
वक्त वह बड़ा ही अच्छा था
जब मैं छोटा बच्चा था।
50 पैसे का सिक्का पाने को
कविता शौक से सुनाता
धूल के बीच सुबह से शाम तक
गुल्ली-डंडा खेला करता था।
गोलियां-टाफियां खाता था
छोटी निक्कर पहनता
दोस्तों-यारों की जुंडली में
नरेंद्र-संजू के साथ खो जाता।
न कुड़ियों का कोई जिक्र
न पढ़ाई का फिक्र
न फेस-बुक पर कोई स्टेटस
पत्थर मार अंबियां गिराता।
जब दोस्त सारे मेरे थे साथ
मिनटों की तरह गुजरते साल
स्कूल की सीढ़ी चढ़ आए कालेज में
जिदंगी सफल बनाने की ललक में।
अब दुनियादारी निभानी पड़ती है
सॉरी-थैंक्यू कहना पड़ता है
फिर भी यार मेरे पूछते हैं
अकेला-अकेला क्यों रहता है?
मैं जवाब नहीं दे पाता हूं
बस चुप्पी में खो जाता हूं
फिर आंसू पोंछकर कहता हूं
तुम चलो मैं आता हूं।
सब पूछते हैं वजह पत्थर दिल की
मैंने कहा-याद आ गई गुजरे वक्त की
भाई-बहन, मम्मी-डैडी के प्यार की
दोस्तों-यारों और हैप्पी-हैप्पी पलों की।
जब दिल पर बोझ बढ़ जाता है
सब बिगड़ा-बिगड़ा लगता है
तब एक ही बात मैं करता हूं
वक्त वह बड़ा ही अच्छा था
जब मैं निक्का बच्चा था।
जहां अपना समझता था
वक्त वह बड़ा ही अच्छा था
जब मैं छोटा बच्चा था।
50 पैसे का सिक्का पाने को
कविता शौक से सुनाता
धूल के बीच सुबह से शाम तक
गुल्ली-डंडा खेला करता था।
गोलियां-टाफियां खाता था
छोटी निक्कर पहनता
दोस्तों-यारों की जुंडली में
नरेंद्र-संजू के साथ खो जाता।
न कुड़ियों का कोई जिक्र
न पढ़ाई का फिक्र
न फेस-बुक पर कोई स्टेटस
पत्थर मार अंबियां गिराता।
जब दोस्त सारे मेरे थे साथ
मिनटों की तरह गुजरते साल
स्कूल की सीढ़ी चढ़ आए कालेज में
जिदंगी सफल बनाने की ललक में।
अब दुनियादारी निभानी पड़ती है
सॉरी-थैंक्यू कहना पड़ता है
फिर भी यार मेरे पूछते हैं
अकेला-अकेला क्यों रहता है?
मैं जवाब नहीं दे पाता हूं
बस चुप्पी में खो जाता हूं
फिर आंसू पोंछकर कहता हूं
तुम चलो मैं आता हूं।
सब पूछते हैं वजह पत्थर दिल की
मैंने कहा-याद आ गई गुजरे वक्त की
भाई-बहन, मम्मी-डैडी के प्यार की
दोस्तों-यारों और हैप्पी-हैप्पी पलों की।
जब दिल पर बोझ बढ़ जाता है
सब बिगड़ा-बिगड़ा लगता है
तब एक ही बात मैं करता हूं
वक्त वह बड़ा ही अच्छा था
जब मैं निक्का बच्चा था।

