उठ, अभी तक सो रहा है... शर्म नहीं आती। इतना सुनते ही मेरी आंख खुली। मेरी आंखों के सामने भोले बाबा शिव शंकर थे। उनकी तीसरी आंख से आग की लपटें निकल रही थीं। चेहरा लाल, गले में पड़े भुजंग फुंफकार रहे थे और त्रिशूल लहरा रही थी।
मैंने तुरंत बिस्तर त्यागा और रौद्र रूप के चरणों में गिर गया। मैंने बोला-भोले बाबा क्या गुस्ताखी हो गई?
भोले बाबा बोले-गुस्ताखी, तुम इन्सानों ने तो घोर अपराध कर डाला। मेरा नंदी अपनी मां से मिलने आया। मैंने सोचा वह बहुत खुश होगा लेकिन हुआ इसके उलटा। उसे वह बहुत घायल अवस्था में मिली। अब वह उसे छोड़कर मेरे पास आने को तैयार नहीं। या तो तुम मेरे वाहन हो जाओ या नंदी को मनाकर लाओ।
मैं गिड़गिड़ाया-आपका वाहन और मैं...? भोले बाबा कुछ तो दया करो। हां, मैं नंदी जी को मनाने आपके साथ चलने को तैयार हूं।
यह सुनते ही भोले बाबा मेरी बाजू पकड़कर नंदी के पास ले चले। वहां पहुंचे तो नंदी गौ माता के पास उदास बैठे थे। मुझे देखते ही मुझ पर बिफर पड़े-यही है मेरी मां का गुनहगार?
मैं हैरान होकर नंदी को देखने लगा-गुनहगार? मैंने तो कुछ नहीं किया। मैं तो सो रहा था?
यह सुनते ही नंदी बोले-सो रहा था, मेरी मां ने तुम्हें बच्चों की तरह पाला। जब तक छोटा था मेरे हिस्से का दूध तुम्हें दे दिया। लेकिन उसका सिला क्या दिया तुम लोगों ने, खुद ही देखो। गौ माता आज लावारिस हालत में घूम रही हैं। आत्मा तो घायल है ही, शरीर भी लहूलुहान है। कल मैं मां से मिलने आ रहा था तो एक आदमी गौ माता को डंडे से पीटे जा रहा था। मैंने पूछा तो बोला इसने मेरे खेतों में फसल को उजाड़ दिया। जबकि आप लोगों ने मेरे हिस्से के दूध को पूरी उम्र पिया और मैंने कभी ऐतराज नहीं जताया। कुछ आगे बढ़ा तो कई जगह गौ माता निरीह सी बैठी उदास दिखीं। किसी ने घर से निकाल दिया तो किसी ने खाना नहीं दिया.. तो कोई लाठी लेकर पीछे दौड़ रहा था।
नंदी बोले जा रहे थे-कुछ आगे आया तो मेरी नजर मेरी मां पर पड़ी। उन्हें एक ट्रक में डालकर ले जाया जा रहा था। ट्रक में जगह तीन के लिए थी लेकिन २५-३० गौ माता और मेरे भाइयों को डाल रखा था। उनमें से कई तो बेहोश हो गए थे। आगे जाकर उनको जंगल में ट्रक से ऐसे उड़ेल दिया जैसे कूड़े को डंपिंग साइट में फेंक देते हैं।
नंदी की आंखों से अविरल धारा बह निकली। वे बोले जा रहे थे-मैंने अपनी मां को बड़ी मुश्किल से गहरी खाई में ढूंढा। वे बेहोश और लहूलुहान हालत में पड़ी थीं। बड़ी देर बाद उनको होश आया तो मुझे सामने पाकर उनको ढांढस बंधा। अब मैंने फैसला लिया है कि मां को छोड़ कर कहीं नहीं जाऊंगा। भोले बाबा कोई और वाहन ढूंढ लें।
मैं इतना सब सुनते-सुनते जैसे सन्न हो गया।
इतने में भोले बाबा बोल उठे-अगर मेरे पास नंदी नहीं होगा तो मैं संसार में भक्तों के दुखों का निवारण करने के लिए कैसे जा पाऊंगा। अब एक ही उपाय है तुम नंदी के स्थान पर मेरे वाहन बन जाओ?
मैंने भोले बाबा के चरण पकड़ लिए-बाबा मैं बहुत शर्मिंदा हूं कि गौ माता के साथ ऐसा सुलूक हुआ। लेकिन आप तो जानते हैं कि नंदी जी का काम मैं नहीं कर सकता। आप ही बताएं इस समस्या का हल कैसे हो सकता है?
भोले शंकर बोले-गौ माता कामधेनु का ही रूप हैं। तुम्हारे के लिए दूध देती है। खेतों के लिए गोबर। बीमारियों को हरने के लिए गौ मूत्र। इतना ही नहीं खेतों को जोतने के लिए बैलों की जोड़ी भी। अपने बच्चों तक को तुम्हारी सेवा में लगा देती हैं। इसके बाद तुम अपनी मां के साथ ऐसा सुलूक कैसे कर सकते हो?
मैं शर्म से जमीन में गड़ा जा रहा था। मैंने कहा-बाबा, कुछ तो उपाय होगा?
बाबा बोले-एक ही उपाय है। तुम गौ माता की सेवा करने की कसम खाओ ताकि भविष्य में यह शिकायत सामने न आए। अगर ये नहीं थमा तो मत बोलना कि संसारियों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। तुम अपनी जिम्मेदारी मान लो और निभाओ तो मैं नंदी को अपने साथ चलने के लिए मना लूंगा?
मैंने इतना सुनते ही नंदी के सामने हाथ जोड़े और बोला-हम बहुत शर्मिंदा हैं नंदी जी। वादा करता हूं भविष्य में हम अपना कत्र्तव्य जरूर निभाएंगे। आपको शिकायत का मौका नहीं देंगे। भोले बाबा से भी वादा रहा कि हम गौ माता का निरादर नहीं करेंगे।
इतना सुनते ही भोले बाबा ने नंदी को अपने साथ चलने के लिए कहा। नंदी ने भी हामी भर दी और उठ खड़े हुए। दोनों चल दिए कैलाश की ओर....
अब मैं इस सोच में हूं कि शिवजी से किया वादा कैसे निभाऊंगा। इसके लिए तो आप सबकी मदद की जरूरत है। क्या आप भोले बाबा से किए वादे को निभाने में मेरी मदद करेंगे?
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