दीपक बोला फुलझड़ी से
तू काहे इतराय
मेरे बिना तो दिवाली
अधूरी रह जाय।
फुलझड़ी बोली मुस्काय
अब तो दीपक भाई
बात तो तेरी ठीक
पर पटाखा हर ओर छाए।
पटाखा बोला-फुलझड़ी, दीपक
क्यों ऐसी बात सुनाय
दिवाली त्योहार है प्यार का
बिना रोशनी अधूरा रह जाए
आओ हम सब मिलकर
दीपोत्सव मनाएं।
तू काहे इतराय
मेरे बिना तो दिवाली
अधूरी रह जाय।
फुलझड़ी बोली मुस्काय
अब तो दीपक भाई
बात तो तेरी ठीक
पर पटाखा हर ओर छाए।
पटाखा बोला-फुलझड़ी, दीपक
क्यों ऐसी बात सुनाय
दिवाली त्योहार है प्यार का
बिना रोशनी अधूरा रह जाए
आओ हम सब मिलकर
दीपोत्सव मनाएं।
No comments:
Post a Comment